ऐतिहासिक रानी कुंडी : रानी डूबी तो राजा ने भी त्रिवेणी में लगा दी छलांग
मनेंद्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी। मनेन्द्रगढ़ शहर के बुंदेली ग्राम पंचायत में रानीकुंडी तीर्थस्थल अपने प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक मान्यता के लिए जाना जाता है। मकर संक्रांति के मौके पर इस धार्मिक स्थल पर विशाल मेले का आयोजन हुआ। पर क्या आप जानते हैं कि यह रानी कुंडी या यह नाम क्यों पड़ा और क्या है यहां का इतिहास? जनश्रुतियों के अनुसार यहां कभी राजा धवरेल का राज्य था। वे प्रतिदिन यहां त्रिवेणी संगम पर स्नान के लिए आते थे। उनकी रानी भी अपनी दासियों के साथ यहीं के एक कुंड में स्नान करती थीं।
बताया जाता है कि एक बार रानी नहाते नहाते कुंड के गहरे भाग में चली गई और डूब गई। जब इसकी जानकारी राजा को मिली तो वे भी इस दुःख को सहन नहीं सके और संगम में जल समाधि ले ली। तभी से यहां स्थित शिव मंदिर की महत्ता चली जा रही है। मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इस स्थल को सच्चे प्रेम का गवाह माना जाता है, इस कारण भी यहां युवाओं की अच्छी खासी भीड़ लगती है।
हर साल की तरह इस साल भी यहां मकर संक्रांति मेला का आयोजन किया गया। इस बार मेले के साथ-साथ कबड्डी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया. इसमें स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साहवर्धन किया।
स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने बुन्देली स्थित रानीकुण्डी धाम में सामुदायिक भवन का विधिवत भूमिपूजन किया। उन्होंने कहा कि यह भवन बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं, खिलाडिय़ों एवं बालिकाओं के ठहरने के लिए एक सशक्त सुविधा के रूप में कार्य करेगा।
उन्होंने बताया कि रानीकुण्डी का प्राकृतिक झरना अत्यंत अलौकिक है। जैसे प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती का संगम है, उसी प्रकार यहां कौडिय़ा नदी, हसदेव नदी एवं रानीकुण्डी का संगम होता है, जिसे स्थानीय लोग प्रयागराज एवं राजिम संगम की तर्ज पर मानकर श्रद्धा से स्नान करते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि आने वाले वर्षों में रानीकुण्डी तीर्थ स्थल अपने विराट स्वरूप में और अधिक भव्य दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि आज किया गया सामुदायिक भवन का भूमिपूजन इसी विकास की कड़ी है। रानीकुण्डी से उनकी गहरी आस्था जुड़ी है और वे हर वर्ष मकर संक्रांति पर यहां आते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्षेत्र में एक बड़े पुल की आवश्यकता को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे इसी कार्यकाल में पूर्ण किया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं को यहां कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
पारंपरिक खेलों को बढ़ावा
उन्होंने कहा कि वर्षों से यहां पुरुष एवं महिला कबड्डी, सुआ, करमा एवं शैला जैसे पारंपरिक खेलों का आयोजन होता आ रहा है, जो हमारी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का कार्य करता है। इन आयोजनों को निरंतर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर धर्मपाल सिंह, आशीष सिंह, जानकी बाई खुसरो, जयलाल सिंह, सोनमती ऊर्रे, लखन लाल श्रीवास्तव, सरजू यादव, विभिन्न पंचायतों के सरपंच एवं पंच, भगत बाबू, आयोजन समिति के सदस्य, खेलो इंडिया के खिलाड़ी/प्रतिभागी, दर्शकगण एवं बड़ी संख्या में मेला देखने आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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