सिर्फ शाकाहारियों को ही नहीं होती विटामिन बी-12 की कमी
नई दिल्ली। आम मान्यता है कि विटामिन बी-12 की कमी केवल शाकाहारियों को होती है या सप्लीमेंट लेते ही तुरंत ताकत आ जाती ह। सीके बिरला अस्पताल के डॉ. तुषार तायल के अनुसार, विटामिन B12 के बारे में सही जानकारी न होना निदान (Diagnosis) में देरी का कारण बनता है, जिससे तंत्रिका तंत्र (Neurological) से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
विटामिन B12 हमारे शरीर के लिए एक अनिवार्य पोषक तत्व है, जो ऊर्जा के स्तर, मस्तिष्क के स्वास्थ्य, मूड और रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाओं) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके महत्व के बावजूद, विटामिन B12 को लेकर कई गलतफहमियां फैली हुई हैं।
विटामिन बी-12 को लेकर कुछ मिथक हैं जिनको दूर करना पहले जरूरी है
पहला मिथक – केवल शाकाहारी या वीगन लोगों में ही B12 की कमी होती है। सच- हालांकि B12 मुख्य रूप से मांस, डेयरी, मछली और अंडों में पाया जाता है, लेकिन केवल इन्हें खाना ही पर्याप्त नहीं है। विटामिन B12 का अवशोषण (Absorption) पेट के एसिड स्तर पर निर्भर करता है, जो उम्र के साथ कम हो जाता है। इसलिए, मांसाहार करने वाले बुजुर्गों में भी इसकी भारी कमी देखी जा सकती है।
दूसरा मिथक – B12 की कमी के लक्षण हमेशा गंभीर होते हैं। सच-शुरुआत में इसके लक्षण बहुत मामूली होते हैं, जैसे थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी या हल्की याददाश्त कमजोर होना। लोग अक्सर इसे तनाव या बढ़ती उम्र का संकेत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि इलाज न किया जाए, तो यह नसों को स्थायी नुकसान, एनीमिया और संतुलन खोने जैसी गंभीर समस्याओं का रूप ले सकता है।
तीसरा मिथक – फोर्टिफाइड फूड्स (Fortified Foods) कमी रोकने के लिए काफी हैं। सच- कई अनाज या दूध के विकल्पों में विटामिन B12 अलग से मिलाया जाता है, लेकिन वे हर किसी के लिए पर्याप्त नहीं होते। खासकर उन लोगों के लिए जिनका शरीर भोजन से पोषक तत्वों को सोखने में अक्षम है। केवल इन पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।
चौथा मिथक – सभी विटामिन B12 सप्लीमेंट एक ही तरह से काम करते हैं। सच- सप्लीमेंट की प्रभावशीलता उसकी खुराक और लेने के तरीके (Type and Route) पर निर्भर करती है। सामान्य कमी के लिए गोलियां ठीक हैं, लेकिन अगर अवशोषण की समस्या है, तो डॉक्टर इंजेक्शन या जीभ के नीचे रखने वाली (Sublingual) गोलियों की सलाह देते हैं। बिना डॉक्टरी परामर्श के सप्लीमेंट न लें।
पांचवा मिथक – सामान्य ब्लड टेस्ट रिपोर्ट का मतलब है कि कोई कमी नहीं है। सच-कभी-कभी ब्लड टेस्ट में B12 का स्तर सामान्य दिखता है, फिर भी व्यक्ति में इसके लक्षण मौजूद हो सकते हैं। सटीक स्थिति जानने के लिए ‘मिथाइलमलोनिक एसिड’ (MMA) और ‘होमोसिस्टीन’ जैसे एडवांस टेस्ट की जरूरत हो सकती है, जो कोशिकीय स्तर पर B12 की उपलब्धता बताते हैं।
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