प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना; मटर की खेती से मिली नई दिशा

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना; मटर की खेती से मिली नई दिशा

रायपुर। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत रबी फसलों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, विशेष रूप से दलहन (चना, मटर, मूंग, उड़द) एवं तिलहन (सरसों, मूंगफली) फसल शामिल है। योजना का उद्देश्य दंतेवाड़ा जिले में दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाकर आत्मनिर्भरता विकसित करना है। यह योजना कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों की आय में वृद्धि करने पर केंद्रित है।

कृषक शिवराम ने कहा कि अच्छी कीमत मिलने से उनकी आमदनी बढ़ेगी और वे अन्य किसानों को भी दलहन फसलों की खेती के लिए प्रेरित करेंगे। रबी सीजन (अक्टूबर से प्रारंभ) के लिए इसके क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना एवं क्षेत्र आच्छादन कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

ग्राम चंदेनार के कृषक शिवराम भी इन योजनाओं से लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने बताया कि वे पूर्व में खरीफ में केवल धान की खेती करते थे। योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने रबी में दलहन फसल अपनाई और मटर की खेती से बेहतर परिणाम प्राप्त किए। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से उनकी खेती की लागत कम रही और फसल विकास बेहतर हुआ।

धान कटाई के बाद दलहन-तिलहन की ओर आगे बढ़ते किसान

दंतेवाड़ा जिले में पहली बार बड़े पैमाने पर धान कटाई के बाद खाली पड़ी कृषि भूमि में रबी फसलों की बुवाई की जा रही है। रबी फसल क्षेत्र आच्छादन कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को दलहन और तिलहन फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पहल से परती भूमि की वर्षों पुरानी परंपरा समाप्त हो रही है और खेत वर्षभर उत्पादनशील बन रहे हैं।

रबी फसलों के विस्तार से किसानों को अनेक लाभ मिल रहे हैं। दलहन एवं तिलहन नकदी फसलें होने के कारण किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त हो रहा है और वर्ष में दोहरी फसल से अतिरिक्त आय हो रही है। दलहन फसलों की जड़ों में पाए जाने वाले राइजोबियम बैक्टीरिया मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और मृदा स्वास्थ्य में सुधार आता है।

इन उपलब्धियों के पीछे जिला प्रशासन, कृषि विभाग तथा कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एफपीओ के माध्यम से किसानों को संगठित कर समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उत्पादित फसलों को बाजार से जोड़ने में सहायता प्रदान की जा रही है।

रबी फसलों के प्रति बढ़ती रुचि दंतेवाड़ा जिले को एकल फसली क्षेत्र से बहु-फसली क्षेत्र की ओर रूपांतरित कर रही है। आने वाले वर्षों में किसान दलहन और तिलहन उत्पादन में अधिक आत्मनिर्भर बनेंगे तथा कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्राप्त होगी।

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