गोलियां नहीं अब यहां गूंजती है ढोल-मांदर की थाप – केदार कश्यप

बस्तर पंडुम बना लोकनृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प और आदिवासी रीति-रिवाजों का मंच रायपुर। बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और जनजातीय अस्मिता को सहजने एवं संवारने के उद्देश्य से बस्तर … Read More

पर्यटन : राजस्थान में चोखी ढाणी तो छ्त्तीसगढ़ में है “बस्तर पोंडुम”

जगदलपुर (अर्जुन झा)। राजस्थान का टूरिज्म मॉडल छत्तीसगढ़ के लिए भी मुफीद साबित हो सकता है। जिस तरह से राजस्थान की चोखी ढाणी पर्यटकों का दिल जीत लेती है उसी … Read More