चार दिन में गर्भ की घोषणा, 7 दिन में बच्चा, कोर्ट ने यह कहा

चार दिन में गर्भ की घोषणा, 7 दिन में बच्चा, कोर्ट ने यह कहा

जबलपुर। यह कहानी एक ऐसे फौजी की है जिसकी पत्नी ने मिलन के चौथे दिन ही अपनी प्रग्नेंसी की घोषणा कर दी।  फिर सातवें महीने में ही बच्चे को जन्म दे दिया। पत्नी भी पुलिस में कांस्टेबल है। पति का माथा ठनका तो पहले तो उसने तलाक मांग लिया। अब पति ने बच्चे के डीएनए टेस्ट की मांग की है। इसपर  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक बड़ी टिप्पणी करते हुए डीएनए टेस्ट की इजाजत दे दी है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक तलाक याचिका में नाबालिग बच्ची के डीएनए टेस्ट का आदेश देने वाले फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह टेस्ट व्यभिचार यानी कि धोखेबाजी के आरोपों की जांच के लिए है, न कि बच्चे को अवैध घोषित करने या उसकी कानूनी स्थिति को अस्थिर करने के लिए। जस्टिस विवेक जैन ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी डीएनए नमूने देने से इनकार करती है, तो फैमिली कोर्ट भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114(h) या बीएसए 2023 के संबंधित प्रावधानों के तहत पत्नी के खिलाफ अनुमान लगा सकती है। यानी कि अगर पत्नी नमूने देने से इनकार करती है, तो कोर्ट यह मान लेगा कि पति जो कह रहा है, वही सच है। क्योंकि इस टेस्ट का मकसद पत्नी के ‘अफेयर’ की जांच करना है, बच्ची को ‘नाजायज’ साबित करना या उसे नीचा दिखाना नहीं।
यह मामला व्यभिचार के आरोप पर दायर तलाक याचिका से संबंधित है। पति बच्चे का पितृत्व जानने या भरण-पोषण की देनदारी से इनकार करने के उद्देश्य से डीएनए टेस्ट नहीं चाहता है। पति का कहना है कि वह भारतीय सेना में है और पत्नी ने उसे अक्टूबर 2015 में बुलाया था। पति ने कोर्ट से कहा कि वह छुट्टी पर घर आए और सिर्फ 4 दिन में पत्नी ने कह दिया कि वह प्रेग्नेंट है।। पति के अनुसार, डॉक्टर भी 4 दिन में प्रेग्नेंसी की स्थिति नहीं बता सकते। इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होता है। दूसरी तरफ बच्चा भी तय समय से पहले पैदा हुआ।
यह तीसरी तलाक याचिका है। पहली याचिका 2019 में आपसी सहमति से तलाक लेने की बात कहने पर वापस ले ली गई थी। दूसरी याचिका भी उसी वर्ष दायर की गई थी, लेकिन पत्नी दूसरी मोशन के लिए उपस्थित नहीं हुई, जिससे कार्यवाही बंद हो गई। वर्तमान तलाक याचिका 2021 में दायर की गई है और व्यभिचार (धोखेबाजी) पर आधारित है। फैमिली कोर्ट ने 22 अगस्त को डीएनए टेस्ट का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ पत्नी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
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