“पोट्ठ लईका पहल” से राजनांदगांव जिले में 3.68 प्रतिशत घटा कुपोषण

“पोट्ठ लईका पहल” से राजनांदगांव जिले में 3.68 प्रतिशत घटा कुपोषण

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के संकल्प के साथ संचालित किए जा रहे “पोट्ठ लईका पहल” अभियान के अत्यंत सकारात्मक और उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। जून 2025 से प्रारंभ हुए इस विशेष अभियान के तहत सामूहिक प्रयासों और जनजागरूकता गतिविधियों की बदौलत जिले की कुपोषण दर में 3.68 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

इस अभियान की सफलता के पीछे महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा एनआरएलएम (छत्स्ड) का बेहतरीन समन्वय रहा है। जागरूकता अभियान के अंतर्गत प्रत्येक साप्ताहिक गुरुवार को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘पालक चौपाल’ का आयोजन किया जाता है। पोषण का पाठ इन चौपालों में अभिभावकों को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए तिरंगा भोजन के महत्व, स्थानीय पौष्टिक आहार, निरंतर स्तनपान और एनीमिया (खून की कमी) की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

इसके साथ ही, आवश्यकतानुसार चिन्हित बच्चों और माताओं को स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जरूरी दवाइयां व सप्लीमेंट्स भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कुपोषण के आंकड़ों में ऐतिहासिक सुधार (तुलनात्मक विवरण) जून 2025 में जब यह अभियान शुरू हुआ था, तब 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 55,797 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर 9,751 बच्चों को कुपोषित श्रेणी में चिन्हित किया गया था। मार्च 2026 तक की वर्तमान स्थिति में यह संख्या घटकर केवल 5,146 रह गई है।

पोट्ठ लईका पहल” से कुपोषण में उल्लेखनीय कमी

एक नज़र में देखें कुपोषण में आई कमी के स्पष्ट आंकड़े

मार्च 2026 की वर्तमान स्थिति में जिले के 0 से 5 वर्ष के कुल 55 हजार 247 बच्चों में गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या घटकर 328, मध्यम कुपोषित 3 हजार 848, सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रिशन से प्रभावित 128 तथा मॉडरेट एक्यूट मालन्यूट्रिशन से प्रभावित 842 रह गई है। वर्तमान में जिले में कुल 5 हजार 146 बच्चे कुपोषित श्रेणी में हैं। जून 2025 में जिले में कुपोषण का प्रतिशत 11.23 था, जो मार्च 2026 तक घटकर 7.55 प्रतिशत हो गया है। इस प्रकार “पोट्ठ लईका पहल” अभियान के माध्यम से जिले में कुपोषण दर में कुल 3.68 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

बड़ी उपलब्धि जून 2025 में जिले में कुपोषण का कुल प्रतिशत 11.23 प्रतिशत था, जो लगातार और नियोजित प्रयासों से मार्च 2026 तक घटकर 7.55 प्रतिशत पर आ गया है। जनसहभागिता से सुधर रही नौनिहालों की सेहत राजनांदगांव जिला प्रशासन द्वारा सुपोषण की दिशा में तय किए गए कड़े लक्ष्यों और मैदानी अमले की मुस्तैदी से हजारों बच्चों को कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर निकाला जा चुका है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान आगे भी इसी गति से जारी रहेगा ताकि जिले के शत-प्रतिशत बच्चों को स्वस्थ और सुपोषित बनाया जा सके। तकनीक आधारित मॉनिटरिंग और सामुदायिक सहभागिता का यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय मिसाल बन रहा है।

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