शंकराचार्य महाविद्यालय में तनाव मुक्ति पर कार्यशाला का आयोजन
भिलाई। श्री शंकराचार्य महाविद्यालय में तनाव मुक्ति पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट गुरलीन चाने थीं। उन्होंने तनाव की विस्तृत परिभाषा देते हुए उससे निपटाने का आसान तरीके बताए। उन्होंने कहा कि तनाव से भागें नहीं बल्कि उसके पहचानकर स्वीकार करें और कम करने के उपाय करें।
सुश्री गुरलीन ने बताया कि तनाव का स्रोत आपके शरीर या मन में हो सकता है। पर इसका असर आपके पूरे व्यक्तित्व पर पड़ता है। यदि आपके शरीर के किसी अंग में कोई दिक्कत हो तो आपका मन भी उससे जुड़ जाता है। जब तनाव बढ़ता है तो व्यवहार भी बदलने लगता है जिसका प्रभाव आपके आसपास रहने वाले लोगों के साथ आपके संबंधों पर भी पड़ता है।
उन्होंने विद्यार्थियों एवं व्याख्याताओं तथा प्राध्यापकों को कुछ आसान से अभ्यास करवाकर उन्हें हैप्पी हॉरमोन्स रिलीज करने के तरीके बताए। कार्यक्रम का संचालन डॉ सुषमा दुबे ने किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ अर्चना झा, अकादमिक डीन डॉ दुर्गा प्रसाद राव, पत्रकार दीपक रंजन दास, व्याख्याता एवं प्राध्यापकों के अलावा शिक्षा संकाय के प्रशिक्षणार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इसके बाद संडे कैम्पस के सहयोग से एक विचारगोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें सुश्री गुरलीन चाने के साथ प्राचार्य डॉ अर्चना झा, मनोविज्ञान की प्राध्यापक द्वय डॉ गायत्री जय मिश्रा एवं डॉ कंचन सिन्हा के अलावा डॉ सुषमा दुबे, डॉ जयश्री वाकणकर ने सहभागिता की। इस सत्र का संचालन संडे कैम्पस के माडरेटर दीपक रंजन दास ने किया।
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