आदिवासी उत्थान को समर्पित पद्मश्री डॉ बुधरी ताती से वनमंत्री ने की मुलाकात
दंतेवाड़ा। जिले के हीरानार गाँव की निवासी डॉ. बुधरी ताती (बड़ी दीदी) ने चार दशकों से अधिक समय तक वनांचल और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करके जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आदिवासी उत्थान में अद्वितीय योगदान दिया है । उन्हें उनके इस ऐतिहासिक और निरूस्वार्थ समाज सेवा के लिए भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया है ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण एवं राष्ट्र निर्माण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे विशेष जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने दंतेवाड़ा जिले के ग्राम हीरानार स्थित मां शखिनी महिला उत्थान केंद्र पहुंचकर पद्मश्री सम्मान से अलंकृत प्रख्यात जनजातीय समाजसेवी डॉ. बुधरी ताती से आत्मीय मुलाकात की।
इस अवसर पर वनमंत्री श्री कश्यप ने डॉ. बुधरी ताती को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके स्वास्थ्य और कुशलक्षेम की जानकारी ली। उन्होंने जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं के संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना की।
वनमंत्री श्री कश्यप ने कहा कि डॉ. बुधरी ताती ने जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनका जीवन और कार्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि डॉ. ताती का योगदान केवल बस्तर क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। समाज और संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मां शखिनी महिला उत्थान केंद्र जनजातीय संस्कृति के संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरणादायी कार्य कर रही है। यह केंद्र महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
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