द्रौपदी संग इस पहाड़ी पर ठहरे थे पाण्डव
दंतेवाड़ा। जिला मुख्यालय से 72 किलोमीटर दूर तेलंगाना की सीमा पर स्थित पुजारी कांकेर ऐसा गांव है जहां आज भी पांडवों की पूजा होती है। अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ पाण्डव अज्ञातवास के दौरान यहां कुछ समय बिताया था। पांचों पांडव भाइयों के लिए यहां अलग- अलग पुजारी भी नियुक्त किए गए हैं।












