भोजन निगलने की समस्या हमेशा एसिडिटी नहीं होती : डॉ सिंकु कुमारी
भिलाई। आहार को निगलने की समस्या से हर कोई वाकिफ है। कभी कभी भोजन करने के बाद वह पेट में जाने की बजाय बाहर निकल जाना चाहता है। अस्थाई रूप से ऐसा होना चिंता का विषय नहीं है पर यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है तो यह गंभीर हो सकती है। भोजन को निगलने में होने वाली इस कठिनाई को डिस्फेजिया कहते हैं। ऐसा तीन मुख्य कारणों से हो सकता है।
हाईटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल की गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ सिंकु कुमारी बताती हैं कि डिस्फेजिया होना हमेशा सामान्य एसिडिटी या गैस नहीं है। इसे नजरअंदाज करने से स्थिति गंभीर हो सकती है। यह भोजन नली के संकुचन, तंत्रिका संबंधी समस्याओं या गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है।
डॉ सिंकु कुमारी बताती हैं कि डिस्फेजिया का एक कारण फूड पाइप में सिकुड़न (स्ट्रिक्चर्स) भी है। इसमें आहार को आमाशय तक ले जाने वाली संकरी हो जाती है। आहार नली में संक्रमण या घाव में इसका कारण हो सकते हैं। भोजन को नीचे धकेलने वाली मांसपेशियों का ठीक से काम न करना भी इसका कारण हो सकता है। इसके अलावा भोजन नली से जुड़ी अन्य गंभीर स्थितियां भी सकती हैं।
सबसे ज्यादा मामले जीईआरडी के सामने आते हैं। गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज में पेट में मौजूद अम्लीय पदार्थ वापस ग्रासनली में चला जाता है। लंबे समय तक एसिड रिफ्लक्स के कारण ग्रासनली संकरी हो जाती है, जिससे भोजन का गुजरना मुश्किल हो जाता है।
इसी तरह हाइटल हर्निया में आमाशय का एक हिस्सा डायाफ्राम से निकलकर छाती में खिसक जाता है, जिससे रिफ्लक्स और निगलने में समस्या होती है।
स्ट्रोक के मरीजों में निगलने वाली मांसपेशियां और तंत्रिकाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे मुंह से पेट तक भोजन ले जाना मुश्किल हो जाता है।
इसी तरह ग्रासनली का कैंसर भी भोजन को निगलने में रुकावट पैदा कर सकता है। हालांकि यह बेहद दुर्लभ है, लेकिन बेहतर इलाज के लिए इसका जल्द पता लगाना महत्वपूर्ण है।
पार्किंसंस या मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी स्थितियां निगलने को नियंत्रित करने वाली नसों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे निगलने में कठिनाई हो सकती है।
डॉ सिंकु कुमारी बताती हैं कि निगलने की समस्या बार-बार हो रही हो तो तुरन्त किसी योग्य गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट का परामर्श लेना चाहिए। वह एक साधारण एंडोस्कोपिक जांच से सही स्थिति का आकलन कर इलाज शुरू कर सकता है। अधिकांश मामलों में यह समस्या आहार में सुधार और लाइफ स्टाइल मॉडिफिकेशन से ठीक की जा सकती हैं। स्थिति गंभीर होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
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