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दुर्ग। "भारतीय सांस्कृतिक धारा - अनादि से आज तक" पर आयोजित कायर्शाला में अपने विचार व्यक्त करते हुए विभिन्न मनीषियों ने कहा कि हमें अपनी जनजातीय परम्पराओं को ईमानदारी से लिपिबद्ध करना चाहिए। बीआईटी दुर्ग के सभागार में दुर्ग विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय कायर्शाला में आदिवासी जनजातीय समाज की प्रतिनिधि जयमति कश्यप, उग्रेश मरकाम, अंजनी मरकाम, रमेश हिड़ामे, हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कुलदीपचंद अग्निहोत्री, लखनलाल कलामे, लक्ष्मण मरकाम ने अपने वक्तव्य रखे।

दुर्ग। “भारतीय सांस्कृतिक धारा – अनादि से आज तक” पर आयोजित कायर्शाला में अपने विचार व्यक्त करते हुए विभिन्न मनीषियों ने कहा कि हमें अपनी जनजातीय परम्पराओं को ईमानदारी से लिपिबद्ध करना चाहिए। बीआईटी दुर्ग के सभागार में दुर्ग विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय कायर्शाला में आदिवासी जनजातीय समाज की प्रतिनिधि जयमति कश्यप, उग्रेश मरकाम, अंजनी मरकाम, रमेश हिड़ामे, हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कुलदीपचंद अग्निहोत्री, लखनलाल कलामे, लक्ष्मण मरकाम ने अपने वक्तव्य रखे।

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