भिलाई। शिक्षाविद् तथा मोटीवेटर डॉ. जवाहर सूरीशेट्टी ने कहा कि वर्तमान में सिलेबस द्वारा प्रदान की जा रही इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को 75 प्रतिशत थ्योरिटीकल तथा मात्र 25 प्रतिशत तकनीकी प्रैक्टिकल नॉलेज होता है। वे कार्पोरेट स्किल्स के अनुरूप नहीं होते और इन्हें रोजगार पाने के लिये जद्दोजहद करना पड़ता है। युवा अपने आपको इतना स्किल्ड बनायें जिससे वे एम्प्लॉयबल बन सकें। डिग्री की पढ़ाई के दौरान ही अधिक से अधिक शॉर्टटर्म कोर्सेस कर अपने आपको दक्ष बनायें।












