भिलाई। शुक्रवार 6 अप्रैल, 2018 की वह शाम मेरे जीवन की एक अनमोल धरोहर बन गई। मौका था डॉ संतोष राय की तीसरी पीएचडी को सेलीब्रेट करने का। सामने की पंक्ति में वो अध्यापक बैठे थे जिनके चरणों में बैठकर मैंने शिक्षा हासिल की थी। डॉ अमिताभजी दत्ता, डॉ हरिनारायणजी दुबे, डॉ प्रमोद शंकरजी शर्मा, डॉ आरपी अग्रवाल, डॉ सय्यद सलीम अकील। इनमें से डॉ दुबे ही एक अकेले थे जो विज्ञान संकाय से थे। मैं वाणिज्य संकाय का विद्यार्थी था। डॉ अकील उन दिनों अध्यापक नहीं थे जब मैं पढ़ रहा था। डॉ एनएस बघेल, डॉ बीपी अग्रवाल, डॉ एआर वर्मा की अनुपस्थिति खल रही थी।












