भिलाई। समलैंगिक संभवत: सृष्टि के आरंभ से ही हैं। भारतीय शास्त्रों एवं ग्रंथों में इनका उल्लेख प्रत्येक युग में हुआ है। त्रेता युग में जब श्रीराम वनवास के लिए निकलते हैं तो नदी तट पर वृहन्नलाएं उनके इंतजार में खड़ी मिलती हैं। महाभारतकाल में धनुर्धर अर्जुन का वृहन्नलारूप और शिखण्डी भी इसी के रूप हैं। स्वयं सदाशिव की कल्पना भी अर्धनारीश्वर के रूप में की गई है।












