भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय की लैंगिक समानता (जेंंडर इक्वालिटी) इकाई द्वारा गुरू घासीदास जयंति के अवसर पर जाति विहिन समाज की आवश्यकता पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में गुरू घासीदास के मूल सिद्धांत वाक्य ‘मनखे-मनखे एक समान’ को आधार बनाया गया। जाति के आधार पर व्यक्ति की पहचान न हो अपितु कर्म के आधार पर व्यक्ति को पहचाना जाये, सभी को समान रूप से विकास करने का अधिकार हो। गुरू घासीदास का मूल सिद्धांत यहि है मनुश्य की श्रेष्ठता का आधार जाति नहीं अपितु मानवता है। यह विचार प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने अपने उद्बोधन में रखा।












