भिलाई। हममें से प्रत्येक के पास 24 घंटे ही होते हैं। विश्राम एवं व्यक्तिगत स्वच्छता से बचे हुए समय का हम कैसा उपयोग करते हैं, इससे हमारी उत्पादकता तय होती है। यदि समाज को देने की इच्छा हो तो जीवन के बाद भी हमारी उत्पादकता बनी रह सकती है। हम मरणोपरांत अंग दान कर ऐसा कर सकते हैं।












