दुर्ग। हिन्दी की वर्णमाला का स्वरूप वैज्ञानिक है। उसका उच्चारण, स्थान, ध्वन्यात्मक रूप बहुत स्पष्ट है। इसे अभ्यास से सीखा जा सकता है तथा इसका स्पष्ट उच्चारण एवं लेखन संभव है। यह बातें शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव के डॉ शंकरमुनी राय ने आज व्यक्त किये। वे शासकीय वि.या.तामस्कर स्वशासी महाविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।












