अमरकंटक। स्थानीय भाषा में अध्यापन भारत में शिक्षण एवं शोध के क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती है. देश के विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं जिससे संवाद बाधित होता है. उक्त बातें आईसीएसएसआर के सदस्य प्रो. पी कनगासबापथि ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय आदिवासी विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किये. उन्होंने भारत की विकास यात्रा की चर्चा करते हुए यह स्पष्ट किया कि किस तरह कौटिल्य के समय से लेकर अब तक विकास की परिभाषा बदल गई है.












