भिलाई। शहर की बेटी शैली बिदवईकर का मानना है कि सुगम संगीत का सफर बिना लता ताई के अधूरा होता है. आप कितना भी पॉप गा लो, फास्ट नम्बर्स कर लो, पर जब तक लता ताई के गीतों को आवाज नहीं दे देते, न आपको सुकून मिलता है और न ही श्रोता को. वे संगीत की देवी थीं, साक्षात मां सरस्वती थीं. उनके गीतों का गाना भी अपनी तरह की एक साधना है. वर्षों बाद भिलाई पहुंची शैली ने महात्मा गांधी कला मंदिर में शनिवार शाम विश्वकर्मा जयंती के उपलक्ष्य में अपनी प्रस्तुति दी. हिन्दी, मराठी, तमिल, तेलुगू और बंगला भाषा में गीत प्रस्तुत कर उन्होंने समा बांध दिया.












