कांग्रेस महाधिवेशन से चाहे जो अच्छा संदेश गया हो पर एक गलती इस पूरे किए धरे पर पानी फेर सकती है. यह छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सालों की तपस्या और चार साल की मेहनत को ग्रहण लगा सकती है. यह राहुल गांधी की चार हजार किलोमीटर लंबी पदयात्रा की चमक को फीका कर सकती है और अंत-पंत लोगों के मन में वही वितृष्णा के भाव जगा सकती है जिसकी वजह से कांग्रेस का लगभग पूरे देश से सफाया हो गया. लोगों को उतनी चिढ़ कांग्रेस से नहीं है जितनी चाटुकारिता से है, और यह तो उसकी पराकाष्ठा थी.












