संतानहीनता किसी भी दंपति के जीवन को सूना कर सकती है. पहले इसका कोई उपाय नहीं था. लोग संतान के लिए एक पत्नी को छोड़कर दूसरी ले आते थे, कोई-कोई तीसरी या चौथी भी ले आता था. नतीजा अकसर शून्य ही रहता था. इसके साथ एक सामाजिक बुराई और जुड़ गई कि संतान नहीं होने पर स्त्री को बांझ ठहराया जाने लगा. बांझ स्त्री का जीवन नर्क से बदतर हो जाता था. विज्ञान ने तरक्की की. पहले इसे साबित किया कि संतानहीनता में जितना रोल महिला का हो सकता है, उतना ही पुरुष का भी हो सकता है.












