Gurupurnima in modern times

Gurupurnima in modern times

सोमवार को भारत में गुरूपूर्णिमा का पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया. विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों, व्याख्याताओं और प्राध्यापकों का आशीर्वाद लिया. अधिकांश शिक्षकों ने विद्यार्थियों के सिर पर अपना हाथ रखना तक जरूरी नहीं समझा. भारतीय समाज में यह कोई रातोंरात आया परिवर्तन नहीं है. सृष्टि के आरंभ में ही इसकी भी नींव रखी जा चुकी थी. इस अवसर पर एक श्लोक का प्रयोग बहुतायत में किया जाता है –
गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरः।
गुरूर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।

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