यही है वह पुरुषवादी मानसिकता जिसके कारण पूरा भारतीय समाज विश्व भर में बदनाम है. यहां बेटी पराया धन होती है. वह धन जो एक पुरुष दान में प्राप्त करता है और दान देकर मुक्त होता है. पुरुष ही नहीं, महिलाओं में भी यही सोच गहरे तक पैठी हुई है. माता-पिता बेटे का आश्रित बनकर जीवन गुजार दें तो समाज कुछ नहीं कहता बल्कि बेटे को श्रवण कुमार बताता है. पर यही काम अगर बेटी करे तो समाज की भ्रुकुटी तन जाती है.












