सनातन में पैरों को बड़ा महत्व दिया गया है. चलने फिरने, भागने-तौड़ने, चौकड़ी लगाने से लेकर पैर छूने और दबाने तक इसकी सेहत का ध्यान लगभग सभी उम्र में किया गया है. बच्चों के पैरों की मालिश से शुरू होकर यह सफर जीवन पर्यन्त चलता रहता है. दरअसल, पैरों की सेहत का सीधा संबंध मस्तिष्क के आकार एवं सेहत से भी जुड़ा हुआ है. यदि पैर स्वस्थ और ताकतवर रहेंगे तो आप न केवल डिमेंशिया से बचे रहेंगे बल्कि आपकी संज्ञानात्मक क्षमता भी सुरक्षित रहेगी. एक स्टडी ने सिद्ध किया है कि पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करने से संज्ञानात्मक गिरावट से बचे रहते हैं.












