Bastar Forest Goods

Forest becomes a source of livehood as maoist insurgency takes a backfoot in Bastar

रायपुर। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर बस्तर जिले के सुदूर गांव चांदामेटा, मुण्डागढ़, छिन्दगुर और तुलसी डोंगरी जो पहले नक्सल गतिविधियों के गढ़ माने जाते थे, अब शांति और विकास की नई पहचान बन रहे हैं। जहां कभी नक्सलियों की ट्रेनिंग हुआ करती थी, वहीं आज वन विभाग स्थानीय युवाओं को वानिकी कार्यों का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्व-रोजगार दे रहा है।

Full size460 × 300

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *