रायपुर. छत्तीसगढ़ मेंआज सुबह से ही बच्चों की टोलियां गांव और शहर की गलियों में घूम रही हैं।वे दरवाजे पर दस्तक देते हैं और छेर-छेरा गाते हैंं। वो कहते हैं छेर-छेरा दे न दाई छेर-छेरा, दाई कोठी के धान ल हेर-हेरा।नया धन घर में आने के बाद उसके समान वितरण से जुड़ा यह एक विलक्षण पर्व है। इसका एक आध्यात्मिक पहलू भी है। यह बड़े-छोटे के भेदभाव और अहंकार की भावना को समाप्त करता है।












