तांदुला नदी का पुनरुद्धार, बालोद जिला प्रशासन और आईआईटी भिलाई के बीच MoU
बालोद। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की विशेष पहल पर शुक्रवार को जल संसाधन विभाग और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी न केवल तांदुला नदी का कायाकल्प करेगी, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में नदी पुर्नजीवन के लिए एक वैज्ञानिक, सतत और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित मॉडल पेश करेगी. जल संसाधन विभाग के प्रमुख पीयूष देवांगन ने इस अनुबंध में हस्ताक्षर कर नदी के लिए मील का पत्थर मानी जाने वाली शुरुआत की।
आईआईटी भिलाई में आयोजित इस कार्यक्रम में दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्य नारायण राठौर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने जिला प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि तांदुला को सजाने और संवारने का यह प्रयास बहुत अच्छा है. उन्होंने विश्वास जताया कि इस परियोजना की सफलता भविष्य में राज्य की अन्य नदियों के पुनरुद्धार के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने परियोजना की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में नदी प्रदूषण, गाद (सिल्टेशन) और प्रवाह की अस्थिरता जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। इसे दूर करने के लिए तांदुला जलाशय से हीरापुर एनीकट तक के तीन किलोमीटर के क्षेत्र को एक आदर्श नदी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत आईआईटी भिलाई के विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किए जाएंगे। नदी के जल को निर्मल बनाने के साथ-साथ यहाँ जैव विविधता संरक्षण और जल प्रबंधन के उन्नत तकनीकी समाधान लागू होंगे। योजना की एक खास विशेषता यह है कि इसमें प्रकृति आधारित समाधानों के साथ जनभागीदारी को भी प्रमुखता दी गई है, ताकि स्थानीय लोग अपनी नदी के संरक्षण से सीधे जुड़ सकें। इसके अलावा नदी में व्याप्त जलकुंभियों के सदुपयोग और पूरे क्षेत्र को एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की भी योजना है।
प्रस्तुतीकरण के दौरान आईआईटी की टीम ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयावधि में नदी के तंत्र को पर्यावरणीय रूप से सुदृढ़ बना दिया जाएगा। इस अवसर पर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री पीयूष देवांगन सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन की इस पहल से उम्मीद जगी है कि तांदुला नदी जल्द ही अपने अविरल और स्वच्छ रूप में आम जनता की सेवा के लिए तैयार होगी, जो क्षेत्रीय विकास और पर्यावरणीय बहाली का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनेगा।
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