धर्म-पर्यटन-संस्कृति : कवर्धा में जानकी वन धाम शिवालय की प्राण-प्रतिष्ठा

धर्म-पर्यटन-संस्कृति : कवर्धा में जानकी वन धाम शिवालय की प्राण-प्रतिष्ठा

कबीरधाम। जिला तर्गत कुंआ-बिपतरा स्थित जानकी वन धाम में आयोजित नूतन शिवालय प्राण-प्रतिष्ठा एवं महायज्ञ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल विधायक श्रीमती भावना बोहरा के साथ शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने देवाधिदेव महादेव का विधि-विधान से अभिषेक एवं पूजन कर समस्त चराचर जगत के कल्याण की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं की गहन आस्था से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। मंत्री श्री अग्रवाल ने भगवान आशुतोष से प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और निरंतर प्रगति की प्रार्थना करते हुए कहा कि भगवान शिव की कृपा से छत्तीसगढ़ सदैव समृद्ध और प्रगतिशील बना रहे तथा प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख और शांति का वास हो।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज में एकता, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। यह आयोजन न केवल आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का भी कार्य करता है, जिससे नई पीढ़ी अपनी परंपराओं से जुड़ सके। मंत्री श्री अग्रवाल ने इस सफल आयोजन के लिए जानकी वन समिति एवं समस्त क्षेत्रवासियों को साधुवाद देते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी और समर्पण से ही ऐसे भव्य आयोजन संभव हो पाते हैं। उन्होंने क्षेत्र के समग्र विकास और सांस्कृतिक उन्नयन के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

कुंआ-बिपतरा क्षेत्र में स्थित जानकी वन धाम वर्तमान में एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं प्राकृतिक आस्था केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। घने जंगलों, हरियाली और शांत वातावरण से घिरा यह धाम श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। यहां पहुंचने पर जहां एक ओर आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक सौंदर्य मन को आनंदित करता है।

यह धाम मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है। महाशिवरात्रि, श्रावण मास सहित अन्य पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, जिससे इस स्थल की पहचान और अधिक सुदृढ़ हो रही है। जानकी वन धाम केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोक-संस्कृति और सामाजिक समरसता का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। यहां आयोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र में सामाजिक एकता को बढ़ावा मिल रहा है और परंपराओं को संरक्षित किया जा रहा है।

पर्यटन की दृष्टि से भी यह स्थल अत्यंत संभावनाशील है। प्राकृतिक वातावरण, स्वच्छ वायु और शांत परिवेश इसे आध्यात्मिक पर्यटन के लिए उपयुक्त बनाते हैं। कवर्धा शहर से निकटता और सड़क मार्ग से सुगम पहुंच के कारण यहां स्थानीय एवं बाहरी श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। आने वाले समय में यह स्थल छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

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