जापान ने लगाया भारत के शाही आमों पर प्रतिबंध, पैकेजिंग बना कारण
नई दिल्ली। दुनियाभर में भारत के अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी भारतीय किस्मों की विदेशों में काफी मांग रहती है, लेकिन इस बार आम के सीजन में जापान ने भारतीयों आमों के आयात पर रोक लगा दी है, क्योंकि रिपोर्ट्स के मुताबिक आमों के टेस्ट के दौरान कीट नियंंत्रण और डिसइन्फेक्शन प्रक्रिया में कमी पाई गई।

जापान में कृषि नियम काफी सख्त है। वहां फ्रूट फ्लाई जैसे कीड़ों को लेकर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है। इसका मतलब है कि अगर किसी फल में कीट मिलने की आशंका भी हो, तो उसे बाजार में नहीं लाया जा सकता। जापान में आम भेजने के लिए वेपर हीट ट्रीटमेंट (Vapour Heat Treatment) प्रोसेस की जाती रही है।
वेपर हीट ट्रीटमेंट क्या है?
जापान में आम भेजने से पहले भारत में वेपर हीट ट्रीटमेंट प्रक्रिया जरूरी होती है। इसमें आमों को नियंत्रित गर्म और नम हवा में रखा जाता है ताकि उनमें मौजूद कीट या उनके लार्वा खत्म हो जाएं। यह केमिकल-फ्री प्रक्रिया है, जो दोनों देशों के बीच एक्सपोर्ट समझौते का अहम हिस्सा है। इस बार जांच के दौरान जापानी अधिकारियों ने फ्यूमिगेशन और डिसइन्फेक्शन प्रक्रिया में खामियां बताई है, जिसके चलते आमों के आयात पर रोक लगी है।
फ्रूट फ्लाई को रोकने के लिए वेपर हीट ट्रीटमेंट जरूरी
फ्रूट फ्लाई एक तरह की मक्खी होती है, जो ताजे फलों के छिलके के अंदर अपने अंडे देती हैं। जैसे ही अंडे से लार्वा बाहर निकलने लगता है, तो वे फल को अंदर से खाने लगता है। फ्लाई फ्रूट को दुनिया के सबसे खतरनाक एग्रीकल्चर पेस्ट के रूप में देखा जाता है। जापान सहित कई देशों में इसे लेकर बहुत सख्त नियम है, क्योंकि ये मक्खियां तेजी से फैल सकती हैं और इससे घरेलू खेती को भारी नुकसान होने का खतरा रहता है।
किन आमों पर असर पड़ेगा?
इस रोक से आम की छह प्रमुख किस्मों पर असर पड़ सकता है। इसमें हापुस, केसर, बंगनपल्ली, लंगड़ा, चौसा और मल्लिका पर असर पड़ सकता है। इन आमों के एक्सपोर्ट न होने के कारण इससे जुड़े लोगों को काफी नुकसान हो सकता है।
पहले भी जापान कर चुका है बैन
यह दूसरी बार हुआ है, जब जापान ने भारतीय आमों के आयात पर बैन लगाया है। इससे पहले साल 2006 में टोक्यो ने बैन हटाया था। दरअसल, जापान ने 1986 में फ्रूट फ्लाई की आशंका जताते हुए भारतीय आमों पर बैन लगाया था। दोनों देशों के बीच सालों तक चले अध्ययनों और सर्वेक्षणों के बाद साल 2006 में यह बैन हटा था। अब फिर 20 साल बाद जापान की तरफ से बैन लगाया गया है।
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