ज्ञानभारतम् : जीपीएम जिले में उपाध्याय परिवार में मिली रामचरितमानस की दुर्लभ पांडुलिपि
अवधि भाषा में रचित प्राचीन ग्रंथ का डिजिटल संरक्षण
जीपीएम।भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञानभारतम” (राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान) के तहत छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। यहाँ इतिहास, धर्म और साहित्य के संगम वाली रामचरितमानस की एक अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपि प्राप्त हुई है। विशेषज्ञों ने इस प्राचीन ग्रंथ को ऐतिहासिक और भाषाई दृष्टि से अमूल्य बताया है।
यह पांडुलिपि गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत धनौली निवासी श्री ज्ञानेंद्र उपाध्याय के परिवार के पास सुरक्षित थी। परिवार के अनुसार, उनके परदादा ने दशकों पहले इस ग्रंथ की महत्ता को समझते हुए इसे सहेजना शुरू किया था। तब से लेकर आज तक, चार पीढ़ियों ने इस अमूल्य निधि को दीमक और समय की मार से बचाकर रखा। अब ज्ञानभारतम अभियान के माध्यम से इसे वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकृत और डिजिटल रूप से सुरक्षित कर लिया गया है।
पांडुलिपि के संरक्षण कार्य के दौरान कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने इस अवसर पर कहा ये पांडुलिपियां केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा का जीवंत इतिहास हैं। इनका संरक्षण हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपनी समृद्ध विरासत से जोड़ने का एक सेतु है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अवधी भाषा में रचित यह पांडुलिपि कई मायनों में महत्वपूर्ण है।
यह उस काल की लेखन शैली और भाषाई संरचना को समझने का बड़ा स्रोत है। इसके अध्ययन के माध्यम से तत्कालीन सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की जानकारी मिलती है। यह क्षेत्र की प्राचीन ज्ञान परंपरा और शिक्षा के प्रसार का जीवंत एवं ऐतिहासिक प्रमाण है।
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