बस्तर के लड़ाकू मुर्गों का होगा संरक्षण, स्थापित होगा संरक्षण एवं अनुसंधान केंद्र

बस्तर के लड़ाकू मुर्गों का होगा संरक्षण, स्थापित होगा संरक्षण एवं अनुसंधान केंद्र

रायपुर। बस्तर की पारंपरिक एवं गौरवशाली लडाकू ‘असील’ मुर्गा नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पशुधन विकास विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विभाग ने बस्तर संभाग में समर्पित ‘असील कुक्कुट संरक्षण एवं अनुसंधान केंद्र’ स्थापित किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिससे इस विशिष्ट देशी नस्ल के संरक्षण, अनुसंधान और संवर्धन को नई दिशा मिल सकेगी।

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पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिला बस्तर के लडाकू असील मुर्गों की नस्ल की पहचान एवं संरक्षण के लिए विभाग गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि ‘असील’ नस्ल को भारतीय देशी नस्ल पंजीकरण संस्था नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेस करनाल, हरियाणा द्वारा आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया है। इसका एक्सेशन नंबर इसका एक्सेशन नंबर इंडिया-चिकन 2615 असील 12002 निर्धारित किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि बस्तर क्षेत्र की यह पारंपरिक नस्ल अपनी विशिष्ट शारीरिक क्षमता, सहनशीलता एवं स्थानीय पहचान के कारण विशेष महत्व रखती है। इसके संरक्षण के लिए विभाग द्वारा दीर्घकालिक रणनीति के तहत आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।
पशुधन विकास विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पशु एवं पक्षियों के प्रति क्रूरता, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए विभाग जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कर रहा है।

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