ब्रिटिश शासन के निशान मिटेंगे तो कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई का क्या होगा?

ब्रिटिश शासन के निशान मिटेंगे तो कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई का क्या होगा?

नई दिल्ली। भारत अब गुलामी के चिन्हों से मुक्ति पाना चाहता है। अधिकांश लोग भी इससे सहमत हैं कि अंग्रेजों द्वारा रखे गए नामों और गुलामी की याद दिलाने वाली धरहरों के लिए “नए भारत” में कोई स्थान नहीं होना चाहिए। रेलवे बोर्ड ने गुलामी के निशानों को हटाने का आदेश दिया है। यदि सभी विभाग ऐसा ही करने लगे तो देश की अधिकांश शानदार इमारतों को जमींदोज़ करना होगा। कई शहरों को उजाड़ना होगा।

रेलवे बोर्ड ने देशभर के सभी जोन को सख्त निर्देश दिए हैं कि 14 मई तक ब्रिटिश काल के उन तमाम प्रतीकों, प्रथाओं और अवशेषों को हटा दिया जाए, जो आज भी दासता की याद दिलाते हैं। इस अभियान के तहत दिल्ली-हावड़ा रूट पर तत्कालीन ब्रिटिसर्स के लिए बना प्रयागराज का ऐतिहासिक ‘कोरल क्लब’, जो कभी ब्रिटिश रसूख का केंद्र था, वहां से भी ईस्ट इंडियन रेलवे का मेटल लोगो उखाड़ दिया जाएगा।

यही नहीं अधिकारी अब ‘बंद गला’ कोट की जगह आधुनिक बिजनेस सूट या भारतीय जलवायु के अनुकूल सफेद शर्ट-पैंट और भारतीय रेलवे के लोगो वाली स्वदेशी टाई पहनेंगे। गर्मी को ध्यान में रखते हुए खादी और सूती परिधानों को प्राथमिकता दी जा रही है। वर्दी पर लगे पुराने पीतल के बटनों को हटाकर अब उच्च गुणवत्ता वाले फाइबर या स्टील के बटन लगाए जाएंगे, जिन पर गर्व से अशोक चक्र अंकित होगा।

पर क्या इतना करने मात्र से गुलामी के निशान वास्तव में हट जाएंगे? दरअसल यह कोरी भावुकता है। मुगलों और अंग्रेजों ने केवल शासन किया बल्कि उस भारत का निर्माण भी किया जिसे आज हम जानते या पहचानते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजों ने ही Calcutta (कोलकाता), Bombay (मुम्बई), Madras (चेन्नई), कानपुर, बैंगलोर, सिकंदराबाद, करांची (अब पाकिस्तान में) जैसे शहरों को बसाया। प्रयागराज को कैनिंगटन के रूप में विकसित किया गया। शिमला, शिलोंग, डलहौजी, जैसे तमाम हिल स्टेशन्स को बसाया।

यही नहीं इन शहरों में बनाई गई इमारतें – जिनमें विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, पुस्तकालय, संग्रहालय आदि शामिल हैं, क्या केवल नाम बदलकर या पट्टिका हटाकर इनके इतिहास को धूमिल किया जा सकता है? देश के कई बाग बगीचे और सड़कें मुगलकाल या ब्रिटिशकाल की देन हैं। इनमें पुल और ब्रिज भी शामिल हैं। इन सबका अपना अपना इतिहास भी है, अपनी अपनी प्रेरक कहानियां भी हैं। क्या केवल नाम बदल देने से इनका इतिहास मिट जाएगा? ऐसा करने से क्या भारत का इतिहास बदल जाएगा?

#Erasing_History

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