13 साल की किशोरी को बनाया पत्नी, रेस्क्यू कर भेजा गया सखी सेंटर
बाल विवाह के दो मामलों में पॉक्सो के तहत कार्रवाई
सूरजपुर। बाल विवाह के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत सूरजपुर जिले में दो गंभीर प्रकरण सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर रेना जमील के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन तथा पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों मामलों में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम तथा पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा बालिकाओं की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। इन दोनों मामलों में इस निर्देश का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
पहला प्रकरण : भटगांव क्षेत्र के एक गांव में 13 साल 8 माह की एक बालिका का विवाह बालिका का विवाह 04 दिसंबर 2025 को सारासोर मंदिर में लड़की एवं लड़का पक्ष के अभिभावकों की उपस्थिति में पंडित के मंत्रोच्चार के मध्य संपन्न कराया गया था। उस समय बालिका मात्र 13 वर्ष 8 माह की थी। विवाह के बाद वह अपने ससुराल में रह रही थी। बालिका को रेस्क्यू कर सखी वन स्टॉप सेंटर में संरक्षण प्रदान किया तथा बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू की।
दूसरे प्रकरण में टोल फ्री नंबर 1098 पर दोपहर के समय सूचना प्राप्त हुई कि प्रेमनगर के दूरस्थ ग्राम में नाबालिग का विवाह संपन्न कराया जा रहा है। टीम जब घर पहुँची तो बालिका वहाँ नहीं मिली और घर वाले कुछ बताने को राजी नहीं थे। अपराध पंजीबद्ध करने की बात कहे जाने पर घरवाले डर गए और उन्होंने स्वीकार किया कि कार्यवाही के डर से उसी दिन सुबह बारात बुलाकर विवाह संपन्न करा दिया गया तथा लड़की अपने ससुराल चली गई। उक्त जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी को दी गई। इसके बाद संयुक्त टीम वर पक्ष के गांव पहुँची। प्रारंभ में वर एवं उसके पिता ने विवाह न होने की बात कही, परन्तु जब अपराध पंजीबद्ध करने की कार्यवाही की बात कही गई, तो उन्होंने डर के कारण विवाह संपन्न कराने तथा लड़की को अपने घर लाने की बात स्वीकार कर ली। टीम के निर्देश पर लड़की को प्रस्तुत किया गया, जिसके माथे पर सिंदूर लगा हुआ था तथा लड़का पक्ष के सभी लोगों ने विवाह संपन्न होने की बात कबूल की। बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लेकर सखी वन स्टॉप सेंटर भेजा गया।
जिले में बाल विवाह के प्रकरण लगातार प्रकाश में आ रहे हैं तथा कुछ लोग प्रशासन की कार्यवाही के डर से मुहूर्त से पहले ही बारात बुलाकर विवाह संपन्न करा रहे हैं। ऐसे प्रकरणों पर अंकुश लगाने हेतु कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के सख्त निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन तथा पुलिस विभाग की संयुक्त टीम पूरी मुस्तैदी के साथ कार्यवाही कर रही है।
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