बिना बिजली के चलने वाला उड़ावनी पंखा आज भी किसानों की पहली पसंद
देवरी। आधुनिक कृषि यंत्रों और नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग के बाद भी ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक उड़ावनी मशीन की जरूरत बनी हुई है। करीब एक सदी पुरानी यह मशीन आज भी किसानों के लिए अनाज की सफाई का भरोसेमंद साधन है। खेतों से निकले अनाज में मौजूद मिट्टी, भूसा, डंठल अलग करने में यह मशीन असरदार है।

बिजली पर निर्भर नहीं रहने की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी मांग अब भी बनी हुई है। किसानों का कहना है कि आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। उड़ावनी मशीन कम खर्च में बेहतर परिणाम देती है। लंबे समय से यह कृषि काम का अहम हिस्सा है। किसान दादू वीर रघुवंशी, सुनील रघुवंशी, कैलाश धाकड़ ने बताया कि मशीन हल्की है। चार लोग इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते हैं। अनाज की सफाई के लिए चार लोगों की जरूरत होती है। एक दिन में करीब 50 क्विंटल अनाज साफ हो जाता है।
कृषि उपकरण संस्कृति और कृषि की विरासत किसानों ने बताया कि पहले यह उड़ावनी मशीन 2 से 2.5 हजार रुपए में मिल जाती थी। बढ़ती लागत के चलते अब इसकी कीमत करीब 50 हजार रुपए तक पहुंच गई है। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता कम नहीं हुई। किसानों के अनुसार यह मशीन सिर्फ कृषि उपकरण नहीं है। यह ग्रामीण संस्कृति और कृषि विरासत की पहचान है। खेत-खलिहानों में आज भी इसकी अहम मौजूदगी बनी हुई है।
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