रक्तदान केवल जीवनदान ही नहीं, रक्तदाता के लिए भी संजीवनी

रक्तदान केवल जीवनदान ही नहीं, रक्तदाता के लिए भी संजीवनी

रायपुर/धनंजय राठौर/रक्तदान से हम केवल दूसरों को जीवनदान नहीं देते बल्कि यह खुद अपनी सेहत के लिए भी संजीवनी का काम करती है। हर साल 14 जून को पूरी दुनिया में ‘विश्व रक्तदान दिवस’ मनाया जाता है। इस बार सिर्फ स्टेटस न लगाएं, आगे आएं और रक्तदान करें! रक्तदान करना इसलिए भी जरूरी है कि अत्याधुनिक युग में भी, विज्ञान आज तक प्रयोगशाला में कृत्रिम खून (Artificial Blood) नहीं बना पाया है।

दुनिया में कई तरह के दान किए जाते हैं— अन्नदान, वस्त्रदान, धनदान और विद्यादान। ये सभी दान सम्मानीय हैं, लेकिन रक्तदान इन सबसे ऊपर है। जब कोई व्यक्ति दुर्घटना का शिकार होता है, किसी बड़ी सर्जरी से गुजरता है, या थैलेसीमिया और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहा होता है, तब उसके पास जिंदगी और मौत के बीच बहुत कम समय होता है। उस वक्त आपकी दी हुई खून की एक यूनिट (लगभग 350-450 मिलीलीटर) किसी का बुझता हुआ घर का चिराग दोबारा रोशन कर सकती है।

एक यूनिट रक्त से तीन मरीजों को लाभ

ब्लड बैंक में आपके द्वारा दिए गए रक्त को तीन मुख्य घटकों (Components) में अलग किया जाता है:
1. लाल रक्त कणिकाएं (Red Blood Cells – RBC): एनीमिया या अत्यधिक खून बह जाने पर काम आती हैं।
2. प्लाज्मा (Plasma): जलने के मामलों या लीवर की गंभीर बीमारियों में उपयोग होता है।
3. प्लेटलेट्स (Platelets): डेंगू, कैंसर या कीमोथेरेपी के मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होती हैं।

रक्तदान  के स्वयं को लाभ:-

रक्तदान करने से शरीर हार्ट अटैक का खतरा कम: रक्तदान करने से शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है, जिससे खून का थक्का जमने की संभावना कम होती है और दिल का दौरा पड़ने का खतरा काफी घट जाता है।
कैंसर से बचाव: शरीर में आयरन का स्तर नियंत्रित रहने से कुछ प्रकार के कैंसर (जैसे लीवर, फेफड़े और कोलन कैंसर) का जोखिम कम होता है। रक्तदान के बाद शरीर 48 घंटों के भीतर तरल पदार्थ की कमी पूरी कर लेता है और अगले कुछ हफ्तों में नई रक्त कोशिकाएं (New Blood Cells) बनाता है, जिससे शरीर में स्फूर्ति आती है।
फ्री मिनी-हेल्थ चेकअप: रक्तदान से पहले डोनर के हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, पल्स और वजन की जांच की जाती है। साथ ही रक्त की HIV, हेपेटाइटिस बी और सी, तथा मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों के लिए मुफ्त जांच होती है।

इन परिस्थितियों में होती है रक्त की सबसे ज्यादा जरूरत:

• *दुर्घटनाएं और इमरजेंसी:* सड़क हादसों या अन्य दुर्घटनाओं में अत्यधिक खून बह जाने पर।
• गंभीर बीमारियाँ: थैलेसीमिया, कैंसर, और हीमोफिलिया जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को नियमित रूप से खून की जरूरत होती है।
• *प्रसव के दौरान:* कई बार डिलीवरी के वक्त महिलाओं को अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) के कारण खून चढ़ाना पड़ता है।
• *बड़ी सर्जरी:* दिल का ऑपरेशन, ऑर्गन ट्रांसप्लांट आदि में।

(लेखक छत्तीसगढ़ के जनसम्पर्क विभाग में संयुक्त संचालक  हैं।)

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