अनुशासन और 'यस बॉस' का भाव ही सफलता की कुंजी : मुनि आगम सागर

अनुशासन और ‘यस बॉस’ का भाव ही सफलता की कुंजी : मुनि आगम सागर

रायपुर। 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, दिगंबर मुनि आगम सागर महाराज ससंघ का ‘नवोदय तीर्थ वर्षायोग 2026 हेतु दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में भव्य मंगल प्रवेश प्रातः 8 बजे हुआ। मुनिश्री ने एकता के महत्व पर बल देते हुए कहा, “कलऊ एकता बलम” अर्थात कलयुग में एकता ही सबसे बड़ा बल है। समाज में एकता बनाए रखने से ही हमारी संस्कृति सुरक्षित रहती है।
समय के महत्व को समझाते हुए मुनिश्री ने कहा, “सबके हाथ में घड़ी है, लेकिन वास्तव में हम सब समय (घड़ी) के हाथ में हैं। इसलिए हमें समय का सही उपयोग करना चाहिए।” ‘घड़ी-घड़ी’ के महत्व को समझें और यह विचार करें कि जीवन की वह कौन सी ‘घड़ी’ है जो उन्हें आत्म-कल्याण की ओर ले जाएगी।

मुनि ने सलाह दी, “परिवार को सुखी देखना चाहते हो तो हमेशा ‘यस बॉस’ (Yes Boss) कहने की आदत डालो और बड़ों का कहना मानो।” उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वे स्वयं अपने गुरु के सामने विनम्रतापूर्वक नतमस्तक रहे और उनके आदेशों का पालन कर आज इस ऊँचाई पर पहुँचे हैं।

मुनि ने पद्म पुराण से राजा ब्रजचंद्र का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार एक अज्ञानी और क्रोधी राजा, जिसने कभी दिगंबर श्रमण को नहीं देखा था, उनके सानिध्य में एक बार में ही जैन धर्म का अनुयायी बन गया। मुनि ने कहा, “वह राजा तो जैन धर्म से अपरिचित होकर भी एक बार में सब समझकर उत्कृष्ट श्रावक बन गया, लेकिन आप जैन धर्म में जन्म लेकर भी सब कुछ देखते हुए क्यों नहीं सुधर रहे?”

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