आज भी सेहतमंद हैं 75 साल पूरे कर चुके 327 बांध, छत्तीसगढ़ में 10 बांध शतायु
नई दिल्ली। प्रदेश या देश के ऐसे बांध जो 75 वर्ष पूर्ण कर चुके हैं या फिर इससे ज्यादा उम्र के हो गए हैं, आज भी जवान हैं। जलशक्ति मंत्रालय के बड़े बांध रजिस्टर 2023 के अनुसार पूरे देश में 327 ऐसे बड़े बांध हैं जिनकी उम्र 75 वर्ष या इससे अधिक हो चुकी है। इन बांधों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। छत्तीसगढ़ में ऐसे बांधों की संख्या 13, मध्यप्रदेश में 62 और राजस्थान में 28 है।

हमारे देश में ऐसे भी बांध हैं जिनकी उम्र आपको हैरान कर देगी। आंध्र प्रदेश का कुंभूम बांध 1500 इसवीं में बना है जबकि राजस्थान में देश के सबसे पुराने बांधों की संख्या ज्यादा हैं। इसमें उदयसागर बांध 1565, राजसमंद 1676, बारी 1680, फतेहसागर 1687, जयसमंद बांध 1730 में निर्मित हुआ है।
प्रदेश के धमतरी स्थित मुरुमसिल्ली बांध अपने आप में अनोखा है। यह एशिया का पहला बांध है जिसमें साइफन और स्पीलवे दोनों है। इसके साइफन गहराई के अनुसार चढते क्रम में बनाए गए हैं। यानि एक-दो मीटर तो दूसरा तीन मीटर इस प्रकार से बना है। ऐसा बहुत ही कम होता है कि इसके सारे साइफन एक साथ चालू हों या इनसे पानी एक साथ निकल रहा हो। जिन्होंने ऐसा देखा है वो खुद को खुशकिस्मत मानते हैं।
छत्तीसगढ़ के मरोदा टैंक 1909 और हडग़हन टैंक 1905, खापरी टैंक 1909, कुरुद टैंक 1909, पेंडरवन टैंक 1907, डेरिटोला टैंक 1910, धनरस टैंक 1911, अमाचुवां टैंक 1917, तंदुला टैंक 1912 और मुरुमसिल्ली बांध 1923 की आयु 100 साल से अधिक है। वहीं कुम्हारी टैंक 1927, मनियारी टैंक 1930, खारंग टैंक 1931 भी जल्द ही शतायु हो जाएंगे।
बांधों की उम्र का उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता। बांध सभ्यता के दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होते हैं। मानव सभ्यता का विकास हमेशा नदियों के किनारे ही हुआ है। जहां तक बांधों की मजबूती का प्रश्न है तो यह बात तय है कि वो हमारे द्वारा किए जा रहे रखरखाव पर निर्भर करता है।
ये बात भी खास है कि मिट्टी के बांध हमेशा संकेत देते हैं जिससे आपको पता चल जाता है कि इसमें सुधार या मेंटेनेंस की जरूरत है। कांक्रीट के बांध में ऐसा नहीं होता हालांकि वो भी काफी टिकाऊ होते हैं ऐसे में इनके प्रॉपर रखरखाव से हम इनकी उम्र को मानव सभ्यता के साथ समानांतर चला सकते हैं। हमारे प्रदेश के वो सभी बांध जो 75 की उम्र या इसे पार कर चुके हैं वो सुरक्षित हैं, बेहतर स्थिति में हैं।
– अजय नत्थानी, रिटायर्ड ईई, सिंचाई विभाग
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