गर्भवती महिलाओं में किडनी खराब होने का कब बढ़ जाता है रिस्क
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में किडनी में खराबी का खतरा भी हो सकता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान किडनी पर ज्यादा दबाव पड़ता है, क्योंकि किडनी को मां और गर्भ और पल रहे बच्चे, दोनों के लिए अधिक खून फिल्टर करना होता है। हालांकि अधिकतर महिलाओं की प्रेग्नेंसी स्वस्थ रहती है, लेकिन डॉक्टर इस दौरान किडनी के फंक्शन में गड़बड़ी (रीनल डिसफ़ंक्शन) के मामलों में बढ़ोतरी देख रहे हैं। अगर समय रहते इसका पता ना चले और इलाज ना हो, तो यह महिला और बच्चे की सेहत के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

Aajtak.in ने विशेषज्ञों के हवाले से खबर दी है कि कुछ महिलाएं अधिक उम्र होने के बाद बच्चे पैदा करने का फैसला कर रही हैं। जैसे-जैसे मां की उम्र बढ़ती है, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
कुछ मामलों में ज्यादा वजन, हाई बीपी, डायबिटीज और किडनी की कोई पुरानी बीमारी भी रिस्क को बढ़ा सकती है। लंबे समय तक रहने वाला भावनात्मक तनाव ब्लड प्रेशर बढ़ने और सेहत से जुड़ी दूसरी समस्याओं का कारण बन सकता है, जिससे किडनी के काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है। कुछ मामलों में यह भी देखा जाता है कि महिलाएं बिना डॉक्टरी देखरेख के हर्बल या वैकल्पिक दवाएं लेने लगती हैं। इससे भी किडनी को नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि किडनी से जुड़ी सभी समस्याओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इनके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि सही उम्र में प्रेग्नेंसी की योजना बनाएं. प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित रूप से एंटीनेटल चेक-अप (प्रसव-पूर्व जांच) कराएं। स्मोकिंग, शराब और नशीली दवाओं से दूर रहें। डॉक्टर की सलाह के बिना अनावश्यक पेनकिलर लेने से बचें, क्योंकि इनके अधिक इस्तेमाल से किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। यह भी जरूरी है कि प्रेग्नेंसी से पहले स्वस्थ वजन बनाए रखें। संतुलित आहार लें और डॉक्टर की सलाह के हिसाब से एक्सरसाइज करें। प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ टेस्ट भी जरूर कराएं।
किडनी फ़ंक्शन टेस्ट
यूरिन R/M
प्रोटीन, खून, इन्फेक्शन या दूसरी असामान्यताओं का पता लगाना
यूरिन स्पॉट प्रोटीन-टू-क्रिएटिनिन रेश्यो (UPCR)
डॉक्टर की सलाह ले पेट का अल्ट्रासाउंड
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