लोगों को पागल कर रही प्रोटीन की दीवानगी, क्या है Protein Obsession

लोगों को पागल कर रही प्रोटीन की दीवानगी, क्या है Protein Obsession

आजकल जिसे देखो वो प्रोटीन की बातें कर रहा है। यह सच है कि प्रोटीन शरीर के लिए एक जरूरी न्यूट्रिएंट है। मसल्स बनाने, उनकी रिकवरी, इम्यून सिस्टम के फंक्शन, स्किन व हेयर की सही हेल्थ और हॉर्मोन व एंजाइम सिंथेसिस के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है। लेकिन इसका कोई सबूत नहीं है कि ज्यादा प्रोटीन लेना बेहतर होता है।

भारत में खासकर बुजुर्ग, बच्चे और लोअर इकोनॉमिक बैकग्राउंड के लोगों में प्रोटीन की पूर्ति नहीं हो पाती है। दूसरी ओर शहरों में रहने वाले लोगों के पास तो प्रोटीन से भरपूर विभिन्न फूड ऑप्शन है। पर असली समस्या प्रोटीन की कमी नहीं है, बल्कि पोषण का असंतुलन है। हमें ज्यादा प्रोटीन की जगह बेहतर क्वालिटी के न्यूट्रिशन की तरफ ध्यान देना चाहिए।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ प्रोटीन लेने से आपका मसल ग्रोथ होने लगेगा, आपका वजन घटेगा और चर्बी कम हो जाएगी। मसल ग्रोथ एक्सरसाइज, सही कैलोरी इनटेक, पर्याप्त नींद और डाइट बैलेंस पर निर्भर करती है। वेट लॉस के लिए प्रोटीन के अलावा कैलोरी इनटेक, एक्सरसाइज, स्ट्रेस लेवल और मेटाबॉलिज्म का सही होना आवश्यक है।

भारतीय पारंपरिक थाली में प्रोटीन के बढ़िया स्त्रोत हैं। दाल, छोले, राजमा, सोया प्रोडक्ट्स, दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, चिकन प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। दाल के साथ चावल, चने के साथ रोटी आदि सीरियल्स और पल्सेस का बढ़िया मिश्रण करने पर आपको हाई क्वालिटी प्रोटीन के साथ फाइबर और दूसरे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी मिल जाते हैं।

कई बार हाई प्रोटीन का दावा करने वाले पैकेज्ड फूड में भी सोडियम, शुगर, सैचुरेटेड फैट्स और आर्टिफिशियल प्रीजर्वेटिव्स की अत्यधिक मात्रा होती है। ये फायदे के साथ-साथ आपको काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। प्रोटीन सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल अच्छा है, लेकिन हर किसी को इसकी जरूरत नहीं होती। एथलीट, बॉडीबिल्डर्स, कम भूख वाले बुजुर्ग, बीमार और डाइटरी पूर्ति करने में असक्षम लोग सही मार्गदर्शन में सप्लीमेंट्स का सेवन कर सकते हैं।

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