कभी जिन हाथों में थी बंदूक, आज कोसा सिल्क में खिलखिलाया उनका स्वरूप

कभी जिन हाथों में थी बंदूक, आज कोसा सिल्क में खिलखिलाया उनका स्वरूप

सुकमा। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील पुनर्वास नीति और सकारात्मक पहलों के सुखद परिणाम अब धरातल पर नई उम्मीदों की रोशनी बिखेर रहे हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन में एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण देखने को मिला, जब सुकमा जिले की 9 आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने हथकरघा वस्त्र पहनकर रैंप वॉक किया। कभी जिनके हाथों में बंदूकें हुआ करती थीं, वे महिलाएँ आज राज्य के पारंपरिक कोसा सिल्क और हैंडलूम परिधानों में आत्मविश्वास से मुस्कुराती नज़र आईं। यह दृश्य बदलते बस्तर और प्रशासन के सफल पुनर्वास प्रयासों की एक जीवंत और प्रेरक तस्वीर बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर न केवल इन महिलाओं के अदम्य साहस और मुख्यधारा में लौटने के फैसले की सराहना की, बल्कि उनसे आत्मीय संवाद कर उनका मनोबल भी बढ़ाया। पहली बार राजधानी रायपुर पहुँचीं इन महिलाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास और अविस्मरणीय रहा। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से इन महिलाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान और आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री का यह आत्मीय प्रोत्साहन सुकमा और संपूर्ण बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के प्रति राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस गरिमामय प्रस्तुति के पीछे ज़िला प्रशासन और राज्य सरकार की वह दूरदर्शी सोच है, जिसने इन महिलाओं के संकोच को अटूट आत्मविश्वास में बदल दिया। मुंबई से आए पेशेवर विशेषज्ञों ने लगातार 7 दिनों तक इन महिलाओं को रैंप वॉक, वेशभूषा, ग्रूमिंग और माइक पर बेझिझक बोलने का विशेष प्रशिक्षण दिया।

आत्मसमर्पण से लेकर मंच की सुर्खियों तक का यह सफर केवल एक फैशन शो नहीं था, बल्कि पुनर्वास नीति की उस मानवीय संवेदना का प्रमाण था जो भटक चुके युवाओं को मुख्यधारा में लाकर उनके जीवन को सम्मान और गरिमा से संवारने का कार्य कर रही है। जो कदम कभी बस्तर के सुदूर जंगलों में लाल आतंक की राह पर चलने को मजबूर थे, आज वही कदम आत्मविश्वास के साथ रैंप पर चलते हुए छत्तीसगढ़ की समृद्ध हथकरघा विरासत का गौरव पूरे देश के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में आत्मसमर्पित बेटियों ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक कर बदलाव, आत्मसम्मान और नए विश्वास की प्रेरक तस्वीर पेश की। यह केवल एक फैशन शो नहीं, बल्कि हिंसा से विकास, भय से विश्वास और भटके हुए जीवन से सम्मानजनक भविष्य की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की सशक्त अभिव्यक्ति है।

#Kosa_Silk #Bastar_Youth #Ramp_Walk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *