12 साल के किशोर की ऑर्किडोपेक्सी, दुर्लभ है यह स्थिति
भिलाई। बच्चों में वृषणों का नीचे नहीं उतरना एक आम स्थिति है। आम तौर पर यह धीरे-धीरे स्वयं अंडकोष में उतर आता है। यदि ऐसा नहीं होता तो सर्जरी द्वारा इस कार्य को अंजाम दिया जाता है। पर कभी कभी खिंचाव पड़ने के कारण वृषण अंडकोष से वापस शरीर के भीतर चला जाता है। खेलकूद के दौरान या व्यायाम के दौरान भी ऐसी स्थिति निर्मित हो सकती है। यह स्थिति काफी दर्दनाक हो सकती है। इसका इलाज सर्जरी है जिसे आर्किडोपेक्सी कहा जाता है।
यूरोसर्जन डॉ नवीन वैष्णव ने बताया कि छोटे बच्चों में वृषणों का नहीं उतरना एक आम समस्या है। पर इसका इलाज 6 से 18 महीने की उम्र के बीच किया जाता है। वृषणों का तापमान शरीर से कुछ डिग्री सेल्सियस कम रहता है इसलिए वह बाहर स्क्राटम या अंडकोष में रहता है। कमर की नली (इंग्विनल केनाल) में फंसा अंडकोष बाहरी चोटों के प्रति अधिक संवेदनशील भी हो जाता है। यदि वृषण अंदर ही रह गए तो आगे जाकर पुरुष बांझपन की समस्या भी पैदा हो सकती है।
जब इस बच्चे को लाया गया तो वह काफी तकलीफ में था। खेलना-कूदना तो दूर, चलना फिरना तक मुश्किल हो रहा था। बच्चे को ओटी में लिया गया। किशोर को वृषण मरोड़ की समस्या थी जिसमें अंडकोष के घूमने और रक्तप्रवाह रुकने की समस्या उत्पन्न हो गई थी। सर्जरी द्वारा वृषण को वापस अंडकोष में स्थापित कर दिया गया तथा वह दोबारा स्थानच्युत न हो जाए, इसकी व्यवस्था भी बनाई गई।
सर्जरी के बाद किशोर की तकलीफ पूरी तरह से जाती रही। एक दिन बाद ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
#Orchidopexy #Hitek_Hospital_Bhilai #Urology












