उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान समारोह’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान समारोह’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

रायपु।  छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का आधार खेती-किसानी है। अन्नदाता किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, खेती की लागत कम हो और सिंचाई सहित सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों, इसके लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत जनता प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कृषि कार्य से जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सर्किट हाउस में श्रद्धेय मनहरण लाल पाण्डेय की जयंती के अवसर पर आयोजित ‘उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रगतिशील किसानों को उत्कृष्ट कृषक रत्न सम्मान से सम्मानित किया और कृषि के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ हो रही है। राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए धान खरीदी व्यवस्था को और सुगम बनाने के लिए 360 नए धान खरीदी केंद्र खोलने का निर्णय लिया है। नए केंद्र खुलने से किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और खरीदी केंद्रों पर दबाव भी कम होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह में प्रदेशभर से आए प्रगतिशील किसानों को सम्मानित करते हुए कहा कि हमारे किसान परंपरागत खेती के साथ नई तकनीक और नवाचारों को अपनाकर कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। ऐसे किसानों का सम्मान अन्य किसानों को भी बेहतर और उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रद्धेय मनहरण लाल पाण्डेय का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि श्री पाण्डेय का संपूर्ण जीवन जनसेवा को समर्पित रहा। श्री पाण्डेय का खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन से गहरा जुड़ाव था। उन्होंने विशेष रूप से सिंचाई सुविधाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। वे हमारे प्रेरक और मार्गदर्शक रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किसानों की आर्थिक जरूरतों को समझते हुए किसान क्रेडिट कार्ड की शुरुआत की थी। पहले किसानों को खेती के लिए आवश्यक पूंजी जुटाने के लिए महंगे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता था। किसान क्रेडिट कार्ड ने इस स्थिति में बड़ा बदलाव किया।

उन्होंने कहा कि एक समय सहकारी बैंकों से किसानों को 18 प्रतिशत तक ब्याज पर ऋण लेना पड़ता था, जबकि आज किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण की सुविधा मिल रही है। इससे खेती के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना आसान हुआ है और किसानों पर ब्याज का बोझ कम हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान कल्याण को देश की नीतियों में सर्वोच्च प्राथमिकता मिली है। कृषि मंत्रालय का नाम ‘कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय’ किया जाना इस बात का प्रतीक है कि किसानों की समृद्धि सरकार की नीतियों के केंद्र में है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में नए प्रयोगों और अनुसंधान के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत कम करने और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में कार्य हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की नई सिंचाई परियोजनाओं की शुरुआत की गई है। 1,500 पुरानी सिंचाई परियोजनाओं के जीर्णोद्धार के लिए लगभग 2,800 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंद्रावती नदी पर मटनार और देऊरगांव परियोजनाओं सहित अनेक नई सिंचाई परियोजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सिंचाई सुविधाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों और खेतों तक पहुंचे तथा वर्षा पर खेती की निर्भरता कम हो।

वन मंत्री केदार कश्यप ने समारोह को संबोधित करते हुए श्रद्धेय मनहरण लाल पाण्डेय के सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि श्री पाण्डेय ने अपना जीवन जनसेवा को समर्पित किया और समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किया।

इस अवसर पर कर्मवीर सिंह, अखिलेश सोनी, नवीन मार्कण्डेय, राम गर्ग, आलोक चंद्र ठाकुर, हर्षिता पाण्डेय, अनुराग पाण्डेय सहित जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक, श्रद्धेय मनहरण लाल पाण्डेय स्मृति संस्थान के सदस्य तथा प्रदेशभर से आए कृषक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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