कहीं लाइफ में रोमांस को बचाने के लिए तो बच्चों से नहीं भाग रहा जेन-जी?

कहीं लाइफ में रोमांस को बचाने के लिए तो बच्चों से नहीं भाग रहा जेन-जी?

देश के महानगरों के बाद अब छोटे शहरों में ऐसे बच्चों की कमी नहीं है जो शादी नहीं करना चाहते। जो शादी कर रहे हैं उनमें एक अच्छी खासी संख्या ऐसे लोगों की है जो बच्चे नहीं चाहते। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि लोग अपने जीवन में रोमांस को बचाए रखने के लिए बच्चों की जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि बच्चा आने के बाद ही पति-पत्नी में जिम्मेदारी के बंटवारे को लेकर खटपट शुरू होती है।

एक सर्वे के अनुसार बच्चे के आने से पति-पत्नी की जिंदगी में खुशियां तो बढ़ती हैं, लेकिन छोटी-छोटी बातों को लेकर गुस्सा और चिड़चिड़ापन भी बढ़ने लगता है। नींद पूरी न होना, जिम्मेदारियों का बढ़ना और एक-दूसरे को समय न दे पाना इसकी वजह बन सकता है। धीरे-धीरे इसका असर पति-पत्नी की बातचीत, प्यार और बॉन्डिंग पर भी पड़ने लगता है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे में कुछ छोटी बातों का ध्यान रखकर रिश्ते को संभाला जा सकता है। बच्चे के आने के बाद पति-पत्नी की जिंदगी पहले जैसी नहीं रहती। पहले दोनों के पास एक-दूसरे के लिए समय होता था, साथ बैठकर बातें करने और कहीं घूमने जाने का मौका भी मिल जाता था। लेकिन बच्चा होने के बाद दिन का ज्यादातर समय उसकी देखभाल में निकलने लगता है।

बच्चा आने के बाद रात की नींद पूरी नहीं होती। छोटी-छोटी जिम्मेदारियां भी बड़ी लगने लगती हैं। जो बातें पहले प्यारी लगती थीं, वही अब गुस्सा दिलाने लगती हैं। कई बार पति-पत्नी एक-दूसरे से प्यार तो करते हैं, लेकिन थकान और तनाव के कारण अपनी बात सही तरीके से कह नहीं पाते। धीरे-धीरे इसका असर उनके रिश्ते पर भी दिखने लगता है।

रात में बार-बार उठना और दिनभर उसकी देखभाल करना आसान नहीं होता। खासकर जब पति-पत्नी दोनों ठीक से सो नहीं पाते, तो उनका मूड भी जल्दी खराब होने लगता है। ऐसे में पार्टनर की छोटी सी बात भी बुरी लग सकती है। कई बार बिना किसी बड़ी वजह के बहस शुरू हो जाती है। इस समय ये समझना जरूरी है कि हर गुस्से के पीछे नाराजगी नहीं होती, कई बार इंसान सिर्फ थका हुआ होता है।

​बच्चे की देखभाल में दूध पिलाने से लेकर उसे सुलाने तक कई काम होते हैं। अगर इन कामों की जिम्मेदारी एक ही पार्टनर पर ज्यादा आ जाए, तो उसके मन में नाराजगी बढ़ सकती है। उसे लग सकता है कि दूसरा उसकी परेशानी समझ ही नहीं रहा है। वहीं दूसरा पार्टनर भी अपने काम और जिम्मेदारियों को लेकर परेशान हो सकता है। ऐसे में एक-दूसरे को दोष देने के बजाय काम बांटना और जरूरत पड़ने पर मदद मांगना ज्यादा अच्छा रहता है।

​बच्चे के आने के बाद पति-पत्नी की बातचीत अक्सर बच्चे की जरूरतों तक ही सिमट जाती है। पहले जो दोनों अपनी पसंद, दिनभर की बातें और मन की बातें शेयर करते थे, वो धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। इससे दोनों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है। जरूरी है कि दिन में कुछ मिनट सिर्फ एक-दूसरे के लिए निकालें। इस दौरान बच्चे या घर के कामों की जगह अपने मन की बातें करें और पार्टनर की बात भी ध्यान से सुनें।

बच्चे के बाद पहले की तरह साथ समय बिताना या रोमांटिक पल जीना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में किसी एक पार्टनर को लग सकता है कि अब पहले जैसा प्यार नहीं रहा। लेकिन हर बार कम समय देना प्यार कम होने का संकेत नहीं होता। कई बार दोनों अपनी नई जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे होते हैं। एक छोटा सा प्यार भरा मैसेज, तारीफ या गले लगाना भी इस समय रिश्ते में अपनापन बनाए रख सकता है।

​बच्चे के बाद रिश्ते को संभालने के लिए दोनों का एक-दूसरे की स्थिति समझना जरूरी है। अगर पार्टनर चिड़चिड़ा हो रहा है, तो तुरंत उसे गलत ठहराने के बजाय प्यार से पूछें कि उसे क्या परेशान कर रहा है। अपनी जरूरतें भी साफ शब्दों में बताएं। अगर गुस्सा बार-बार बढ़ रहा है, उदासी बनी हुई है या रोजमर्रा की जिंदगी संभालना मुश्किल हो रहा है, तो डॉक्टर या काउंसलर से बात करना मददगार हो सकता है। आखिरकार, बच्चे की देखभाल के साथ पति-पत्नी का रिश्ता भी समय और प्यार चाहता है।

Pic credit : Insights Counselling Centre

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