GST से गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने की सिफारिश : छोटे व्यापारियों को राहत
रायपुर। GST परिषद की 57वीं बैठक में व्यापारियों को राहत देने वाले कई बड़े बदलावों की सिफारिश की गई है। इनमें गिरफ्तारी के नियम में बदलाव, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दायरा बढ़ाना, ट्रकों की जांच आसान करना, रिफंड जल्दी देना और छोटे व्यापारियों को लेट फीस व जुर्माने में राहत जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
नई दिल्ली में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इन बदलावों से व्यापारियों को GST की प्रक्रिया आसान होगी और कारोबार करना आसान होगा।
GST परिषद ने GST कानून में गिरफ्तारी से जुड़े धारा 69 को हटाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही मुकदमा चलाने के लिए टैक्स की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है। सामान्य मामलों में जुर्माने की अधिकतम राशि भी 25 हजार से घटाकर 10 हजार रुपए करने की सिफारिश की गई है। इसका फायदा छोटी गलती या कागजी काम में हुई चूक के मामलों में व्यापारियों को मिल सकता है। हालांकि जानबूझकर टैक्स चोरी या धोखाधड़ी करने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी।
मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि ई-वे बिल की जांच के नियम भी आसान करने का प्रस्ताव है। अब किसी ट्रक या दूसरे मालवाहक वाहन को जांच के लिए रोकने से पहले ठोस वजह या जानकारी होना जरूरी होगा। इसके अलावा संयुक्त आयुक्त या उससे बड़े अधिकारी की मंजूरी भी जरूरी होगी। सिर्फ रास्ते में पड़ने वाले राज्य में जांच के नाम पर ट्रक रोकने की व्यवस्था भी खत्म करने का प्रस्ताव है। इससे ट्रकों को बेवजह रोकने से होने वाली देरी कम होगी और सामान जल्दी पहुंच सकेगा।
GST में फंसा रिफंड भी जल्दी देने की तैयारी है। इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त पैसा सिस्टम के जरिए अपने आप वापस करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अधिकारी की अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। निर्यात से जुड़े मामलों में रिफंड की 90 फीसदी राशि तुरंत देने का प्रस्ताव है। रिफंड आवेदन की जांच का समय भी 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश की गई है। इससे व्यापारियों का पैसा लंबे समय तक नहीं अटकेगा।
GST रजिस्ट्रेशन में बदलाव करना भी आसान करने का प्रस्ताव है। मुख्य कारोबार की जगह से जुड़ी जानकारी को छोड़कर दूसरी जानकारियों में बदलाव पोर्टल के जरिए किया जा सकेगा।
ऑनलाइन सामान बेचने वाले छोटे व्यापारियों को भी राहत मिल सकती है। उन्हें हर राज्य में अलग ऑफिस खोलने की जरूरत से राहत देने का प्रस्ताव है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि GST परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दायरा बढ़ाने की भी सिफारिश की है। प्रस्ताव के मुताबिक पात्रता पूरी होने पर आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य और जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर और फैक्ट्री परिसर के बाहर लगी पाइपलाइन पर भी ITC का लाभ मिल सकेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि लागत कम होने से उद्योगों में निवेश, उत्पादन और नए कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
छोटे कारोबारियों को कानूनी और आर्थिक परेशानी से राहत देने के लिए भी कई प्रस्ताव रखे गए हैं। इसके तहत 10 हजार रुपये से कम की कर राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं करने की सिफारिश की गई है। वहीं, ऐसे मामलों में जिनमें धोखाधड़ी शामिल नहीं है, अगर कारोबारी तय समय के भीतर बकाया टैक्स और ब्याज जमा कर देता है तो सिर्फ 5 प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है।
छोटे व्यापारियों के लिए रिटर्न दाखिल करने को लेकर भी राहत का प्रस्ताव है। 5 करोड़ रुपए तक सालाना टर्नओवर वाले कारोबारी अगर किसी महीने का रिटर्न देर से दाखिल करते हैं, लेकिन संबंधित महीने के अंत तक अपना रिटर्न जमा कर देते हैं, तो उन्हें विलंब शुल्क यानी लेट फीस से छूट देने की सिफारिश की गई है।
वित्त मंत्री ने कहा कि कई बार कारोबारियों से सामान्य प्रक्रियागत गलती या देरी हो जाती है। ऐसे मामलों में अनावश्यक जुर्माना और फीस से राहत मिलने पर छोटे व्यापारी अपने कारोबार पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
1 अप्रैल 2027 से लागू करने की तैयारी
ओपी चौधरी ने बताया कि इन बदलावों को जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि GST 2.0 के तहत टैक्स दरों में राहत के बाद अब टैक्स अनुपालन, GST पंजीयन, रिफंड, ई-वे बिल की जांच और जुर्माने से जुड़े नियमों को आसान करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे व्यापारियों को कम कागजी काम करना पड़ेगा और कारोबार में आने वाली दिक्कतें कम होंगी।
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