शिवकाशी के पटाखा दुकानों को नहीं मिल रहे कारीगर, फिर भी थलपति की चांदी
शिवकाशी। तमिलनाडु के शिवकाशी में देशभर के मुकाबले सबसे ज्यादा पटाखे बनते हैं। पिछले साल तमिलनाडु से करीब 7000 करोड़ रुपये की आतिशबाजी बिकी थी। इस बार यह अनुमान 8000 करोड़ रुपये पहुंच सकता है। इस बिक्री से तमिलनाडु की थलपति विजय सरकार के खजाने पर भी लक्ष्मीजी की कृपा बरसेगी।
कर्ज में फंसे तमिलनाडु के लिए दिवाली बड़ी उम्मीद रहती है। इसका कारण पटाखों की बिक्री से होने वाली कमाई है।
देश भर में पटाखों की बिक्री में शिवकाशी की हिस्सेदारी करीब 90 फीसदी है। दिवाली यहां की पटाखा इंडस्ट्री की पीक सीजन होता है। इस इंडस्ट्री में यहां करीब 8 लाख लोग काम करते हैं।
फायरवर्क्स ट्रेडर्स फेडरेशन के मुताबिक यह बिक्री साल 2024 के 6000 करोड़ रुपये के टर्नओवर के मुकाबले 1000 करोड़ रुपये ज्यादा थी। अगर इस बार भी टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये ज्यादा रहता है तो बिक्री 8000 करोड़ रुपये से ज्यादा की हो सकती है। ऐसे में तमिलनाडु सरकार का खजाना भी काफी भर जाएगा।
पिछले साल पटाखों की ज्यादा बिक्री में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी असर था। दरअसल, दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और उन्हें छोड़ने पर भी बैन है। सिर्फ ग्रीन पटाखों की ही अनुमति है। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने दो घंटे के लिए पटाखे छोड़ने की अनुमति दी थी।
पटाखों की मांग बढ़ने के बावजूद तमिलनाडु के शिवकाशी में पटाखा उद्योग की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। यहां की फैक्ट्रियों में त्योहार के लिए प्रोडक्शन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मजदूरों की कमी और सरकारी नियमों के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। पटाखा निर्माताओं के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले प्रोडक्शन करीब 25% घट गया है।
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