18 वर्षीय युवक का हिप रीप्लेसमेंट, हाइटेक के डाक्टर ने बताई वजह

18 वर्षीय युवक का हिप रीप्लेसमेंट, हाइटेक के डाक्टर ने बताई वजह

भिलाई। हाईटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल में एक 18 वर्षीय युवक का हिप रीप्लेसमेंट (कूल्हा प्रत्योरपण) की सर्जरी की गई। आम तौर पर यह समस्या 50 से ऊपर के रोगियों में होती है। पर इस युवक की समस्या कुछ और थी। छत्तीसगढ़ के एक खास वर्ग में सिकल सेल एनीमिया (सिकलिंग) पाई जाती है। सिंकलिंग के मरीजों में कूल्हा, घुटना तथा कुछ मामलों में कंधे के जोड़ों को भी प्रभावित कर सकती है।
हाईटेक के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ दीपक कुमार सिन्हा ने बताया कि सिकलिंग से पीड़ित लोगों में बचपन या किशोरावस्था से ही जोड़ों की समस्याएं और गंभीर दर्द हो सकता है। इसका मुख्य कारण रक्त प्रवाह में रुकावट और हड्डियों का डैमेज होना है। सिकल सेल रोग में सामान्य रक्त कोशिकाएं हंसिया के आकार की, सख्त और चिपचिपी हो जाती हैं। यह असामान्य कोशिकाएं छोटी रक्त वाहिकाओं को ब्लॉक कर देती हैं, जिससे जोड़ों और हड्डियों तक ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता। इसके चलते एवैस्कुलर नेक्रोसिस, सिकल सेल क्राइसिस या डैक्टिलाइटिस जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
बार-बार जोड़ों में रक्त प्रवाह रुकने से वहां सूजन बनी रहती है। कमजोर इम्यूनिटी के कारण जोड़ों में बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रमुख लक्षणों में कूल्हे, घुटने और कंधे में लगातार या अचानक तेज दर्द होना।प्रभावित जोड़ों में सूजन, लालिमा और गर्माहट महसूस होना। उठने-बैठने, चलने या हाथ-पैर हिलाने में कठिनाई होना आदि हो सकता है।
डॉ सिन्हा बताते हैं कि सूजन को कम करने के लिए दवाएं दी जाती हैं, जो क्राइसिस की आवृत्ति को कम करती हैं। रोगा को रोजाना 10 से 15 गिलास पानी पीना चाहिए ताकि खून गाढ़ा न हो और नसों में रुकावट कम हो। जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने और मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए हल्के व्यायाम और फिजियोथेरेपी बहुत मददगार होती है।
अंतिम स्थिति में एवैस्कुलर नेक्रोसिस के गंभीर मामलों में, जहां हड्डी गलने लगती है, वहां ‘कोर डिकंप्रेशन’ या एडवांस स्टेज में जॉइंट रिप्लेसमेंट (जोड़ प्रत्यारोपण) सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
डॉ दीपक कुमार सिन्हा ने बताया कि उन्होंने अब तक घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण के करीब 500 सर्जरियां की हैं जिसमें प्रत्यारोपण के नतीजे शत प्रतिशत रहे हैं। इनमें 18 से 75 वर्ष तक के मरीज शामिल हैं। हालांकि अधिकांश मरीजों की उम्र 50 वर्ष से अधिक रही है। पर सिकल सेल के मरीजों में कम उम्र के मरीज भी शामिल हो सकते हैं।

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