रूंगटा यूनिवर्सिटी का शोध : अब एआई लगाएगा पैदावार का अनुमान

रूंगटा यूनिवर्सिटी का शोध : अब एआई लगाएगा पैदावार का अनुमान

भिलाई। रूंगटा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल खेत का रकबा, बारिश, खाद, कीटनाशक और पुराने उत्पादन के आंकड़े लेकर उनका विश्लेषण करेगा और पहले ही बता देगा कि फसल का उत्पादन कितना हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के खेती के उपलब्ध डाटा का उपयोग कर विश्लेषण किया गया है। जिसमें यह मॉडल 92 फीसदी तक सटीक अनुमान देने में सफल रहा है।

यह शोध रूंगटा यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अराधना साहू और उनके शोधार्थी शुभ राज गुप्ता ने किया है। इसमें डायरेक्टर रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ. एजाजुद्दीन का भी विशेष मार्गदर्शन रहा। शोध को अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल डिस्कवर एप्लाइड साइंसेज में प्रकाशन किया गया है।

शोधकर्ताओं ने अपने मॉडल का नाम एग्रीसिंथ रखा है। शोधकर्ताओं ने सबसे पहले 102 कृषि रिकॉर्ड जुटाए। इनमें अलग-अलग राज्यों की फसल, खेती का क्षेत्र, उत्पादन, बारिश, खाद और कीटनाशकों से जुड़ी जानकारी शामिल थी। लेकिन इतनी कम जानकारी से मजबूत एआई मॉडल तैयार नहीं किया जा सकता था। इसलिए टीम ने एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल कर इन 102 रिकॉर्ड को बढ़ाकर 1000 रिकॉर्ड का डेटाबेस तैयार किया। इससे मॉडल को सीखने के लिए ज्यादा उदाहरण मिल गए। इसके बाद मॉडल को यह सिखाया गया कि बारिश बढऩे या घटने से उत्पादन पर क्या असर पड़ता है। खाद की मात्रा बदलने पर फसल कैसे प्रतिक्रिया देती है और कीटनाशकों का उपयोग उत्पादन को कितना प्रभावित करता है। एआई ने इन सभी आंकड़ों के बीच संबंधों को समझा और एक पैटर्न तैयार किया।

इस तकनीक का फायदा सरकार और कृषि विभाग दोनों को भी इस प्रकार मिल सकेगा इस तकनीक का फायदा सरकार और कृषि विभाग को भी मिल सकता है। किसी जिले या राज्य में फसल उत्पादन का अनुमान पहले से मिलने पर अनाज खरीद, भंडारण और वितरण की तैयारी समय रहते की जा सकेगी। इससे बाजार में अचानक होने वाली कमी या अधिक उत्पादन की स्थिति से निपटना आसान होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ेगा। यदि भविष्य में इसे वास्तविक और बड़े कृषि आंकड़ों से जोड़ा गया तो यह तकनीक किसानों के लिए एक डिजिटल सलाहकार की तरह काम कर सकती है, जो मौसम और संसाधनों के आधार पर पहले ही बता दे कि खेत से कितनी फसल मिलने की संभावना है।

#Rungta_University #Research

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *