भिलाई। देश की आबादी का दस प्रतिशत दिव्यांगों का है। अनेक ऐसे हैं जिनकी विकलांगता अंशत: या पूर्णत: ठीक हो सकती है, आवश्यकता है उपचार की व उपकरणों की। दिव्यांग दया के पात्र नहीं है वरन सहयोग के आकांक्षी हैं वे आत्म निर्भर होना चाहते है। समाज में इनके प्रति अभी भी उपेक्षा का भाव है। दिव्यांग को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना आवश्यक है, जिसके लिये लोगों को जागरूक करना होगा। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद व स्वरूपानंद महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसका पुरस्कार वितरण समारोह छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक के मुख्य आतिथ्य में तथा अध्यक्षता दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शौलेन्द्र सराफ की उपस्थिति में संपन्न हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री गंगाजली शिक्षण समिति के चेयरमेन आईपी मिश्रा, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद छ.ग. के अध्यक्ष, डी.पी. अग्रवाल, श्री मदनमोहन अग्रवाल, राष्ट्रीय महामंत्री अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद् एवं प्राचार्य डॉ. श्रीमती हंसा शुक्ला उपस्थित थीं।












