दुर्ग। हिन्दी भाषा के अध्ययन विद्यार्थी केवल परीक्षा पास होने के लिए करते है. उसके साहित्य में जो ज्ञान तथा मूल्य निहित है वे उस पर ध्यान नही देते. इसलिए उनमें मूल्य चेतना का अभाव होता है. भाषा संस्कृति की संवाहक होती है. हिन्दी का संवर्धन कर हम अपनी संस्कृति तथा जीवन मूल्यों की रक्षा कर सकते है. उक्त बातें शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. आर.एन. सिंह ने कहीं. डॉ सिंह महाविद्यालय में हिन्दी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.












