नफरत कभी भी किसी समस्या का स्थायी हल नहीं हो सकता. हिंसा से हिंसा नहीं रोकी जा सकती. आंख के बदले आंख- बर्बरता और जहालत की निशानी है. ऐसे इलाज से केवल अंधों के गांव बसाए जा सकते हैं. जिन लोगों की अहिंसा में आस्था है उनके लिए एक अच्छी खबर है. ग्रामीण क्षेत्रों में पनपते अंधविश्वास और झाड़-फूंक की परम्परा के लिए आम तौर पर बैगा-गुनिया और ओझाओं को दोषी ठहराया जाता रहा है. अब तक सरकारें इनपर डंडा ही चलाती रही है. इसका नतीजा यह निकला कि शहरी आबादी भी झाड़-फूंक और तंत्र मंत्र पर भरोसा करने लगी.












